विदेशों से आयात होने वाली दालों और सोयाबीन में पाए जाने वाले ग्लाइफोसेट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि स्वास्थ्य संबंधी चेतावनियों के बावजूद भारत में इस विवादित रसायन के लिए नियमों में ढील दी गई, जबकि WHO की कैंसर रिसर्च एजेंसी IARC इसे संभावित कैंसरकारी मानती है.
भारत में बिक रहे खतरनाक एग्रो-केमिकल के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े गुनहगार हैं. पहला, मोटी कमाई में अंधी हो चुकीं मल्टीनेशनल एग्रोकेमिकल कंपनियां और दूसरा आंखें मूंदे बैठे सरकारी नियामक संस्थान और उनके अधिकारी.
Fertilizer Crisis Reality Check: उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में खाद की उपलब्धता और संकट को लेकर आजतक की टीम ने रियलिटी चेक किया. चंदौली, सहारनपुर और फिरोजाबाद में खाद की पर्याप्त आपूर्ति है, जबकि पीलीभीत और मुजफ्फरनगर में किसानों को खाद की कमी और कालाबाजारी का सामना करना पड़ रहा है.
Rainy Season Vegetables: मॉनसून सीजन में खरीफ फसलों की बुवाई होती है. कुछ ऐसी सब्जियां हैं, जो बरसात के मौसम में तेजी से बढ़ती हैं और बढ़िया देती हैं. बारिश के मौसम में सब्जियों को पानी देने की जरूरत नहीं होती और लागत भी कम आती है. आइए जानते हैं बरसात में किन सब्जियों की खेती करनी चाहिए.
पैराक्वाट डाइक्लोराइड, एक अत्यंत विषैला खरपतवारनाशक है, जो भारत में खुलेआम इस्तेमाल हो रहा है जबकि दुनिया के 74 देशों ने इसे बैन कर दिया है. ऐसे में सवाल है कि क्या पैराक्वाट डाइक्लोराइड बनाने-बेचने वाली कंपनियों और नीति-निर्माताओं की नजर में भारत के नागरिकों की सेहत की कोई कीमत नहीं है?
Side Effects of Pesticides: पैराक्वाट डाइक्लोराइड जैसे विषैले रसायनों का उपयोग किसानों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रहा है. पैराक्वाट डाइक्लोराइड और ग्लाइफोसेट जैसे खतरनाक केमिकल भारत में बैन क्यों नहीं हो रहे हैं? क्या हमारे देश में लोगों की सेहत की कोई कीमत नहीं है?
Farming Advisory: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 15 जून से पहले महाराष्ट्र में अच्छी बारिश की संभावना कम दिखाई दे रही है. ऐसे में कृषि अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि जल्दबाजी में खरीफ फसलों की बुवाई शुरू न करें.
Brinjal Seeds: खास किस्म के सफेद बैंगन की फसल सिर्फ 50-55 दिनों में तैयार हो जाती है और अधिक उपज देती है. राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) इसके बीज ऑनलाइन उपलब्ध करा रहा है, जिन्हें घर बैठे आसानी से खरीदा जा सकता है.
गर्मियों में तेज धूप और बढ़ते तापमान की वजह से तुलसी का पौधा अक्सर मुरझाने लगता है. कई बार पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और पौधे की ग्रोथ भी रुक जाती है. ऐसे में गार्डनिंग एक्सपर्ट्स एक आसान और सस्ता उपाय बताते हैं.
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की अगली किस्त का इंतजार कर रहे किसानों के लिए जरूरी अपडेट है. कुछ अहम प्रक्रियाएं पूरी नहीं करने पर लाभार्थियों के खाते में किस्त आने में दिक्कत हो सकती है.
Farmer Registry: बिहार सरकार ने डिजिटल कृषि के क्षेत्र में 50 लाख से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी कर ली है. फार्मर रजिस्ट्रेशन अभियान का दूसरा चरण 30 जून तक चलेगा. इससे किसानों को डिजिटल पहचान मिलेगी और वे कृषि योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से प्राप्त कर सकेंगे.
चीनी से कई गुना ज्यादा मीठा लेकिन कैलोरी लगभग न के बराबर. यही वजह है कि स्टीविया को डायबिटीज मरीजों के लिए एक बेहतर प्राकृतिक विकल्प माना जाता है. अच्छी बात यह है कि इसे घर की बालकनी, छत या गार्डन में आसानी से उगाया जा सकता है.
Rising Heat Threatens India’s Wheat Harvest: बढ़ता तापमान, खासकर सर्दियों में गर्मी और रात के समय ज्यादा गर्मी पड़ने से देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में उत्पादन कम हो रहा है और गेहूं की गुणवत्ता भी गिर रही है. जलवायु परिवर्तन अब भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गया है.
कृषि मंत्रालय की ओर से चलाए जा रहे 'खेत बचाओ' अभियान का उद्देश्य मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बचाना है. पिछले दशकों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग ने मिट्टी को बंजर कर दिया है. सवाल यह है कि क्या गलत नीतियों की वजह से किसानों के खेत खराब हुए हैं?
जून के महीने में सही सब्जियों का चुनाव और समय पर खेती किसानों को कम लागत में बेहतर पैदावार और बाजार में मजबूत दाम दिलाने का अच्छा मौका दे सकता है, जिससे उनकी आमदनी में लगातार बढ़ोतरी संभव है.
कम लागत और लंबे समय तक लगातार उत्पादन देने वाली यह फसल किसानों के लिए स्थायी आय का मजबूत विकल्प बन सकती है, जिसमें एक बार निवेश के बाद सालों तक मुनाफे का सिलसिला चलता रहता है.
ये पेड़ न सिर्फ सीमित स्पेस के लिए परफेक्ट हैं, बल्कि कम पानी और नियमित प्रूनिंग में भी लंबे समय तक फल देते रहते हैं. घर की बालकनी या छोटे आंगन को भी ये एक मिनी गार्डन में बदल सकते हैं, जहां हर मौसम में ताजगी और स्वाद भरे फल मिलते हैं.
किचन वेस्ट को फेंकने की बजाय अगर सही तरीके से गार्डन में इस्तेमाल किया जाए, तो यह आपकी मिट्टी को प्राकृतिक रूप से मजबूत और उपजाऊ बना सकता है. गर्मियों के मौसम में सब्जियों के छिलके, फलों के बचे हिस्से और अन्य जैविक कचरा धीरे-धीरे सड़कर मिट्टी में जरूरी पोषक तत्व जोड़ता है, जिससे पौधों की ग्रोथ तेज होती है और वे ज्यादा हरे-भरे दिखते हैं.
Litchi Production Down: बिहार के मुजफ्फरपुर की मशहूर शाही लीची इस बार मौसम की मार झेल रही है. जिले में बदलते मौसम, भीषण गर्मी और बढ़ते पारे का सीधा असर लीची की फसल पर देखने को मिल रहा है. हालत ऐसे हैं कि लीची की फसल को 70 फीसदी तक नुकसान हो रहा है.
खरीफ सीजन शुरू होने से पहले किसान धान की नर्सरी की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन तेज गर्मी और लू ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं. अगर इस समय सही तरीके से नर्सरी तैयार नहीं की गई, तो इसका असर पूरे खरीफ सीजन के उत्पादन पर पड़ सकता है. आइए जानते हैं धान की नर्सरी और बुवाई को लेकर एक्सपर्ट्स की सलाह.
गुजरात के अमरेली जिले के एक किसान ने एक ही आम के पेड़ पर 14 तरह के आम उगाकर सबको हैरान कर दिया है. ग्राफ्टिंग तकनीक की मदद से उगाए गए इन आमों में कई पुरानी और खास किस्में शामिल हैं. किसान उकाभाई भट्टी की यह अनोखी खेती अब लोगों और दूसरे किसानों के लिए आकर्षण और प्रेरणा का केंद्र बन गई है.